ICC Women's World Cup : पाँच मिनट में बदली किस्मत! जेमिमा ने ऑस्ट्रेलिया को रुलाकर भारत को फाइनल तक पहुँचाया
क्या आपने देखा वो रात जब जेमिमा रोड्रिग्स ने आखिरी मिनट की कॉल पर नंबर 3 उतरकर भारत को महिला विश्व कप फाइनल तक पहुँचा दिया? ऐसी पारी फिर देखने को मिलेगी?
भारत की महिला क्रिकेट में वह रात किसी परीकथा से कम नहीं थी। नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में जेमिमा रोड्रिग्स ने ऐसे हालात में शतक जड़ा, जब किसी ने उम्मीद तक नहीं की थी। पिछला विश्व कप तक बाहर रहने वाली इस युवा बैटर को खुद नहीं पता था कि वह नंबर 3 पर उतरने वाली हैं—यह फैसला मैच से सिर्फ 5 मिनट पहले हुआ! और फिर जो हुआ, उसने न सिर्फ मैच पलटा बल्कि इतिहास की किताबों में सोने की स्याही से उनका नाम लिख दिया।
जेमिमा का चमत्कार—ऑस्ट्रेलिया जैसी दीवार भी ढह गई
ऑस्ट्रेलिया, यानी महिला क्रिकेट की सबसे बड़ी ताकत। सात बार की विश्व चैंपियन। 339 का पहाड़ जैसा लक्ष्य।
लेकिन जब शेफाली वर्मा जल्दी आउट हुईं और स्कोर केवल 59/2 था, तब मैदान में उतरी जेमिमा रोड्रिग्स।
पिछले टूर्नामेंट में ड्रॉप, आलोचनाओं का सामना, और अब जीवन का सबसे बड़ा मौका…
उन्होंने धैर्य, संयम, क्लास और जुनून से खेला। कभी अकेली मुस्कान, कभी झुककर सांस पकड़ना, और फिर एक बार फिर क्रीज पर जूझना—जेमिमा की 127* रन की पारी सिर्फ पारी नहीं थी, यह इमोशन था। संघर्ष था। बदला था।
और दूसरी ओर साथ मिल रहा था कप्तान हरमनप्रीत कौर का, जिन्होंने 89 रन ठोकते हुए साझेदारी को एक महाकाव्य में बदल दिया। दोनों ने मिलकर 167 रन जोड़े और भारत को मुश्किलों से निकालकर जीत की राह दिखा दी।
ड्रेसिंग रूम में चौंकाने वाला पल
मैच से कुछ मिनट पहले तक जेमिमा को लगा कि वह 5वें नंबर पर उतरेंगी। लेकिन कोचिंग स्टाफ ने अचानक फैसला बदला—
"जेमिमा, तुम नंबर तीन पर जाओगी!"
सोचिए, इतने बड़े मैच में अचानक नई भूमिका!
लेकिन जेमिमा पीछे नहीं हटीं—यही चैंपियन का दिल होता है।
कैच छूटा, किस्मत ने भी दिया साथ
82 पर आसान कैच टपका…
106 पर फिर जीवनदान…
कहते हैं, किस्मत भी उसी का साथ देती है जो दिल से लड़ता है।
और जैसे-जैसे लक्ष्य पास आता गया, जेमिमा थकान से झुककर सांस लेती रहीं, फिर बल्ला उठाकर खड़ी हो जातीं। दर्शकों की आवाजों में उनके लिए सम्मान था—इंडिया का नया स्टार जन्म ले चुका था।
ऑस्ट्रेलिया ने रखी थी चुनौती, पर भारत ने लिखी कहानी
पहले बल्लेबाजी करते हुए फीबी लिचफील्ड (119), एलिसे पेरी (77) और एशले गार्डनर (63) ने भारत के सामने 338 का पहाड़ खड़ा कर दिया था।
एक समय स्कोर 220/2, लेकिन श्री चरनी के शानदार स्पेल ने मैच पलट दिया।
300+ के बाद जो होता है, उसे खेल की भाषा में कहते हैं—दबाव की परीक्षा।
और भारत की लड़कियों ने इस परीक्षा में डिस्टिंक्शन लिया!
अब इतिहास लिखने का मौका – नई चैंपियन तय
अब भारत फाइनल में भिड़ेगा दक्षिण अफ्रीका से।
यह सिर्फ फाइनल नहीं होगा—
यह वह दिन होगा जब भारतीय महिला क्रिकेट दुनिया को बताएगी कि हमारे सपने भी उड़ते हैं, सिर्फ गेंद नहीं।
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