Quick Commerce: बड़ा झटका, ब्लिंकिट-जेप्टो की '10 मिनट डिलीवरी' पर केंद्र की रोक, बदला नियम, अब सुरक्षित होंगे गिग वर्कर्स
भारत सरकार ने ब्लिंकिट, जेप्टो और स्विगी जैसी कंपनियों को '10-मिनट डिलीवरी' का दावा हटाने का सख्त आदेश दिया है। डिलीवरी पार्टनर्स की जान बचाने और सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के तहत लागू हुए इस ऐतिहासिक बदलाव की पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी डिजिटल दुनिया के इस नए और सुरक्षित कानून से अनजान रह जाएंगे।
नई दिल्ली, 13 जनवरी 2026 – भारत के तेजी से बढ़ते क्विक कॉमर्स सेक्टर में आज एक युग का अंत हो गया है। केंद्र सरकार ने एक बड़ा और नीतिगत फैसला लेते हुए ब्लिंकिट (Blinkit), जेप्टो (Zepto), जोमैटो और स्विगी जैसी कंपनियों को अपनी चर्चित '10-मिनट डिलीवरी' की समय सीमा और दावे को तुरंत हटाने का निर्देश दिया है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया के कड़े हस्तक्षेप के बाद इन दिग्गज एग्रीगेटर्स ने इस दबावपूर्ण डेडलाइन को समाप्त करने पर अपनी सहमति दे दी है। यह कदम सीधे तौर पर उन लाखों 'गिग वर्कर्स' के हितों और सुरक्षा के लिए उठाया गया है, जो चंद मिनटों की डिलीवरी की होड़ में अपनी जान जोखिम में डालकर सड़कों पर तेज रफ्तार से वाहन चलाने को मजबूर थे।
ब्रांडिंग से हटा '10 मिनट': अब स्पीड नहीं, सुरक्षा होगी प्राथमिकता
सरकार के इस निर्देश का असर धरातल पर दिखना शुरू हो गया है। कंपनियों ने रातों-रात अपनी मार्केटिंग रणनीति बदल दी है।
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ब्लिंकिट का बदला चेहरा: ब्लिंकिट ने अपनी चर्चित टैगलाइन "10 मिनट में 10,000 उत्पाद" को हटा दिया है। अब इसकी जगह "30,000 से अधिक उत्पाद आपके दरवाजे पर" का नया वादा पेश किया गया है।
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मानसिक दबाव का अंत: 10 मिनट की डेडलाइन के कारण डिलीवरी पार्टनर्स पर भारी मानसिक और शारीरिक दबाव रहता था, जिससे सड़कों पर दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ रहा था।
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सोशल सिक्योरिटी कोड: यह फैसला 21 नवंबर, 2025 से प्रभावी हुए 'सोशल सिक्योरिटी कोड 2020' के सिद्धांतों को लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
संसद में गूँजा मुद्दा: राघव चड्ढा की मांग पर लगी मुहर
क्विक कॉमर्स कंपनियों की कार्यप्रणाली पर संसद के हालिया सत्र में भी तीखी बहस हुई थी।
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गिग वर्कर्स का सम्मान: आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में गिग वर्कर्स के लिए उचित वेतन और सम्मानजनक कामकाजी हालातों की मांग उठाई थी।
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जवाबदेही तय: सरकार ने यह साफ कर दिया है कि ऐप-आधारित व्यवसायों को केवल 'सर्विस प्रोवाइडर' बनकर छूट नहीं मिलेगी, बल्कि उन्हें अपने कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा लाभों (Social Security) के लिए जवाबदेह होना होगा।
क्विक कॉमर्स नीति परिवर्तन: मुख्य विवरण (Policy Snapshot)
| विवरण | नया नियम (New Rules 2026) |
| डिलीवरी टाइम | '10-मिनट' का अनिवार्य दावा अब प्रतिबंधित। |
| मुख्य फोकस | डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा और स्वास्थ्य। |
| लागू कानून | सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 (प्रभावी: 21 नवंबर 2025)। |
| शामिल कंपनियां | ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी, जोमैटो और इंस्टामार्ट। |
| कल्याणकारी लाभ | एक्सीडेंटल इंश्योरेंस, मातृत्व लाभ और वृद्धावस्था पेंशन। |
सोशल सिक्योरिटी कोड 2020: अब गिग वर्कर्स को मिलेंगे ये अधिकार
सरकार ने पहली बार 'गिग वर्कर्स' और 'प्लेटफॉर्म वर्कर्स' को कानूनी परिभाषा के दायरे में लाया है।
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ई-श्रम पोर्टल का महत्व: अगस्त 2021 में शुरू हुए ई-श्रम पोर्टल के डेटाबेस का इस्तेमाल अब सीधे लाभ वितरण के लिए किया जाएगा।
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समर्पित फंड: एक 'नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड' की स्थापना की जा रही है, जो डिलीवरी वर्कर्स के लिए विकलांगता कवर, स्वास्थ्य बीमा और वृद्धावस्था संरक्षण सुनिश्चित करेगा।
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एल्गोरिदम में बदलाव: अब कंपनियों को अपने ऐप के एल्गोरिदम में बदलाव करना होगा ताकि डिलीवरी पार्टनर्स पर 'फास्ट डिलीवरी' के लिए अनावश्यक पेनल्टी न लगे।
डिजिटल नवाचार बनाम सुरक्षा
10 मिनट की डिलीवरी रेस का अंत भारत के ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए एक बड़ा सबक है। यह फैसला साबित करता है कि कोई भी इनोवेशन तब तक सफल नहीं माना जा सकता जब तक वह काम करने वाले श्रमिकों के मौलिक अधिकारों और उनकी सुरक्षा की कीमत पर हो।
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