Chandil Gangwar: खूनी खेल, मुर्गा पाड़ा में ताबड़तोड़ फायरिंग, कुख्यात विजय तिर्की ढेर, गोलियों की गूंज से दहला चीलगु
सरायकेला के चांडिल स्थित चीलगु गांव में बुधवार शाम मुर्गा पाड़ा के दौरान कुख्यात अपराधी विजय तिर्की की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई है। भीड़भाड़ वाले आयोजन में अंजाम दी गई इस खौफनाक वारदात और इसके पीछे छिपे पुरानी रंजिश के खूनी इतिहास की पूरी हकीकत यहाँ दी गई है वरना आप भी कोल्हान में फिर से सुलगती गैंगवार की आग से अनजान रह जाएंगे।
चांडिल (सरायकेला), 24 दिसंबर 2025 – सरायकेला-खरसावां जिले का चांडिल इलाका बुधवार की शाम गोलियों की तड़तड़ाहट से थर्रा उठा। चीलगु गांव में आयोजित पारंपरिक 'मुर्गा पाड़ा' (मुर्गा लड़ाई का खेल) उस समय जंग के मैदान में बदल गया, जब पहले से घात लगाए बैठे अपराधियों ने कुख्यात अपराधकर्मी विजय तिर्की को निशाना बनाकर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। विजय को संभलने का मौका तक नहीं मिला और कई गोलियां लगने के कारण उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में अंजाम दी गई इस दुस्साहसिक वारदात ने पुलिस प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और इलाके में पनपते गैंगवार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इतिहास: चांडिल-चौका बेल्ट और 'मुर्गा पाड़ा' का खूनी कनेक्शन
ऐतिहासिक रूप से कोल्हान और विशेषकर चांडिल-चौका का ग्रामीण क्षेत्र अपनी पारंपरिक परंपराओं के लिए जाना जाता है, जिसमें 'मुर्गा पाड़ा' का आयोजन सामाजिक मेलजोल का बड़ा केंद्र रहा है। हालांकि, पिछले दो दशकों में इन आयोजनों का स्वरूप बदला है। 1990 के दशक के अंत से ही अपराधियों ने इन भीड़भाड़ वाले मेलों को 'सॉफ्ट टारगेट' के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया, क्योंकि यहाँ भारी शोर-शराबे के बीच गोली की आवाज दब जाती है और भगदड़ का फायदा उठाकर भागना आसान होता है। विजय तिर्की जैसे अपराधी अक्सर अपनी धमक दिखाने या जुए के बड़े दांव लगाने इन आयोजनों में पहुँचते रहे हैं, जहाँ पुरानी रंजिशें अक्सर खूनी अंजाम तक पहुँचती हैं।
वारदात का मंजर: जब चीखों में बदल गया उत्सव
चीलगु गांव में बुधवार देर शाम मुर्गा पाड़ा का खेल अपने पूरे शबाब पर था। सट्टेबाजी और शोर के बीच विजय तिर्की भी वहां मौजूद था।
-
अचानक हमला: जैसे ही शाम ढली, अज्ञात हमलावरों ने भीड़ का फायदा उठाते हुए विजय को बेहद करीब से घेर लिया।
-
ताबड़तोड़ फायरिंग: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने विजय पर एक के बाद एक कई राउंड फायर किए। गोलियां लगते ही विजय जमीन पर गिर पड़ा और मौके पर ही उसकी सांसें थम गईं।
-
मची भगदड़: गोली चलने की आवाज सुनते ही लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। अपराधियों ने इसी अफरा-तफरी का फायदा उठाया और अंधेरे का लाभ उठाकर फरार हो गए।
कौन था विजय तिर्की? पुलिस की फाइलों में खौफ का नाम
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, विजय तिर्की कोई साधारण व्यक्ति नहीं था।
-
अपराधिक रिकॉर्ड: वह पूर्व में हत्या, रंगदारी और लूट जैसे कई गंभीर मामलों में संलिप्त रहा है।
-
सक्रिय गैंग: चांडिल और आसपास के इलाकों में उसकी पहचान एक सक्रिय और दबंग अपराधकर्मी के रूप में थी।
-
गैंगवार की आशंका: पुलिस को संदेह है कि इस हत्या के पीछे किसी प्रतिद्वंद्वी गिरोह का हाथ हो सकता है, जो वर्चस्व की लड़ाई में लंबे समय से विजय की तलाश में था।
चांडिल हत्याकांड का संक्षिप्त विवरण (Incident Summary)
| विवरण | जानकारी |
| मृतक का नाम | विजय तिर्की (कुख्यात अपराधी) |
| घटना स्थल | मुर्गा पाड़ा, चीलगु गांव, चांडिल |
| समय | बुधवार देर शाम (24 दिसंबर) |
| कार्रवाई | शव पोस्टमार्टम हेतु भेजा गया, खोखे बरामद |
| संदेह | आपसी रंजिश / गैंगवार |
पुलिस की घेराबंदी: 'जल्द होगा पर्दाफाश'
घटना की सूचना मिलते ही चांडिल थाना पुलिस भारी बल के साथ मौके पर पहुँची। पुलिस ने घटनास्थल से कारतूसों के खोखे और अन्य साक्ष्य बरामद किए हैं। एसडीपीओ के निर्देश पर विशेष छापेमारी टीम का गठन किया गया है जो तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हमलावरों का पीछा कर रही है। इलाके में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
सुलगता कोल्हान और कानून की चुनौती
विजय तिर्की की हत्या ने यह साफ कर दिया है कि कोल्हान के अपराधी अब सार्वजनिक स्थलों पर खून बहाने से भी नहीं कतरा रहे हैं। मुर्गा पाड़ा जैसे आयोजनों में हथियारों का पहुँचना प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है। क्या यह किसी नई गैंगवार की शुरुआत है? यह तो पुलिस की जांच के बाद ही साफ होगा, लेकिन चीलगु गांव में फैला सन्नाटा फिलहाल किसी बड़े तूफान से पहले की शांति लग रहा है।
What's Your Reaction?


