Raja Mahendra Pratap: भारत की पहली सरकार बनाने वाला राजा, 31 साल विदेश में बीते, आज भी नहीं मिला उचित सम्मान
हाथरस के राजा महेंद्र प्रताप सिंह कौन थे? जिन्होंने 1915 में बनाई थी भारत की पहली निर्वासित अंतरिम सरकार और 31 साल रहे बिना भारतीय पासपोर्ट के विदेश में। AMU को जमीन देने वाले महान त्यागी की आज भी क्यों है उपेक्षा?
नई दिल्ली, 2 दिसंबर 2025 – भारत के स्वतंत्रता संग्राम (Freedom Struggle) के इतिहास में कई ऐसे अविस्मरणीय (Unforgettable) नाम हैं, जिन्हें उचित सम्मान (Proper Respect) आज तक नहीं मिल पाया है। इन्हीं में से एक थे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हाथरस (Hathras) की मुरसान रियासत (Mursan Estate) के राजा महेंद्र प्रताप सिंह, जिनका जन्म 1 दिसंबर 1886 को हुआ था। पढ़े-लिखे और दूरदर्शी (Visionary) इस जाट राजा ने न सिर्फ देश के भीतर, बल्कि विदेश की धरती (Foreign Land) से भी आजादी (Independence) की लड़ाई का पहला बिगुल (First Bugle) फूँका था।
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि (Achievement) यह थी कि वह लगभग 31 साल (31 Years) आठ महीने तक विदेश में रहे, 50 से ज्यादा देशों की यात्रा (Travelled) की, लेकिन उनके पास भारतीय पासपोर्ट (Indian Passport) तक नहीं था। कारण साफ़ था: अंग्रेज सरकार (British Government) उनको पासपोर्ट नहीं देती, क्योंकि वह देश की आजादी के लिए लड़ रहे थे।
काबुल में गठित की थी भारत की पहली अंतरिम सरकार
राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण (Important) अध्याय जोड़ा। उन्होंने अफगान (Afghan) सरकार के सहयोग (Cooperation) से 1 दिसंबर 1915 को पहली निर्वासित (Exile) हिंद सरकार का गठन (Formation) किया। यह देश के बाहर से आजादी की लड़ाई को शुरू करने का पहला प्रयास था।
-
सरकार के पद: इस अंतरिम सरकार में राजा महेंद्र प्रताप सिंह स्वयं राजा (King) थे। इसके अलावा, बरकतुल्लाह को प्रधानमंत्री (Prime Minister), उबैद अल सिंधी को भारत का मंत्री और चंपारण पिल्लई को विदेश मंत्री बनाया गया था।
-
अंतरराष्ट्रीय समर्थन: इस सरकार ने ज़ारिस्ट रूस, रिपब्लिकन चीन और जापान से समर्थन (Support) हासिल करने की कोशिश की। 1917 में रूस की फरवरी क्रांति (February Revolution) के बाद, प्रताप की सरकार ने नई सोवियत सरकार से भी पत्राचार (Correspondence) किया।
संयुक्त राष्ट्र से पहले 'संसार संघ' की परिकल्पना
राजा महेंद्र प्रताप सिंह सिर्फ एक क्रांतिकारी (Revolutionary) ही नहीं, बल्कि वह विश्व शांति (World Peace) के महान प्रचारक (Propagandist) थे। 1945 में संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations) की स्थापना (Establishment) से भी बहुत पहले, उन्होंने विश्व शांति के लिए 'संसार संघ' (World Federation) की परिकल्पना (Concept) की थी।
-
संसार संघ का विचार: उनका मानना था कि पूरा विश्व पांच प्रांतों (Provinces) में बंटा होना चाहिए, जिसकी एक राजधानी, एक सेना, एक न्यायालय और एक कानून हो। इससे प्रत्येक देश का सैनिकों पर होने वाला खर्च (Expenditure) रुक जाएगा, जिसका उपयोग मानव कल्याण (Human Welfare) के लिए किया जा सकेगा।
एएमयू और वृंदावन में योगदान
राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने शिक्षा (Education) के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व (Unprecedented) योगदान दिया। वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (Aligarh Muslim University) के छात्र थे। उन्होंने 1929 में इस विश्वविद्यालय के विकास के लिए करीब तीन एकड़ (Acres) जमीन मात्र दो रुपए सालाना पट्टे (Lease) पर दी थी।
इसके अलावा, उन्होंने मथुरा के वृंदावन (Vrindavan) में अपनी जमीन पर 'प्रेम महाविद्यालय' नाम से एक इंटर कॉलेज बनवाया था, जो स्वतंत्रता संग्राम का साक्षी रहा है। हालांकि, आज उनकी वृंदावन स्थित समाधि (Tomb) दुर्दशा (Dilapidated Condition) पर आंसू बहा रही है। उनके समर्थक उन्हें 'भारत रत्न' (Bharat Ratna) देने की मांग (Demand) उठा रहे हैं।
26 अप्रैल 1979 को उनका देहांत हो गया, लेकिन मार्च 2021 में उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके नाम पर अलीगढ़ में एक विश्वविद्यालय स्थापित (Establish) करने की घोषणा की है, जिससे उनके अधूरे सम्मान की पूर्ति होने की आस जागी है।
What's Your Reaction?


