Latehar Naxal: बच्चा चोर समझकर ग्रामीणों ने जिस शख्स को दबोचा, वह निकला 10 लाख का इनामी नक्सली कमांडर
लातेहार के छिपादोहर में ग्रामीणों ने बच्चा चोर समझकर एक संदिग्ध को पकड़ा, जिसकी पहचान 10 लाख के इनामी नक्सली जोनल कमांडर मृत्युंजय भुइयां के रूप में हुई। पलामू प्रमंडल का यह खूंखार नक्सली अब पुलिस की गिरफ्त में है। इस हैरतअंगेज गिरफ्तारी की पूरी इनसाइड स्टोरी यहाँ देखें।
लातेहार/झारखंड, 12 मार्च 2026 – झारखंड के लातेहार जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों और आम जनता दोनों को हैरान कर दिया है। यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है, जहाँ एक खूंखार अपराधी अपनी पहचान छिपाकर घूम रहा था, लेकिन ग्रामीणों की सतर्कता ने उसे सलाखों के पीछे पहुँचा दिया। छिपादोहर थाना क्षेत्र में ग्रामीणों ने एक शख्स को 'बच्चा चोर' समझकर पकड़ा, लेकिन जब उसकी असली पहचान सामने आई, तो सबके पैरों तले जमीन खिसक गई। वह कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि पलामू प्रमंडल का कुख्यात जोनल कमांडर और 10 लाख रुपये का इनामी नक्सली मृत्युंजय भुइयां था।
भीड़ का गुस्सा और फिर चौंकाने वाला खुलासा
छिपादोहर के एक गांव में संदिग्ध परिस्थितियों में घूम रहे दो युवकों को देखकर ग्रामीणों को शक हुआ। इलाके में बच्चा चोरी की चल रही अफवाहों के कारण ग्रामीण काफी सतर्क थे।
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पकड़ा गया 'बच्चा चोर': ग्रामीणों ने घेराबंदी कर दोनों को पकड़ लिया। शुरुआत में उन्हें लगा कि ये बच्चा चोर गिरोह के सदस्य हैं।
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असली चेहरा आया सामने: जैसे ही पूछताछ शुरू हुई और शोर मचा, कुछ स्थानीय लोगों ने युवक के चेहरे को पहचान लिया। पता चला कि वह लंबे समय से फरार चल रहा प्रतिबंधित संगठन का जोनल कमांडर मृत्युंजय भुइयां है। उसके साथ उसका एक सक्रिय साथी भी पकड़ा गया है।
10 लाख का इनाम: पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी
मृत्युंजय भुइयां पलामू प्रमंडल में सक्रिय नक्सली संगठनों का एक बड़ा चेहरा माना जाता है।
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आतंक का पर्याय: उस पर हत्या, लेवी वसूली और पुलिस टीम पर हमले जैसे दर्जनों संगीन मामले दर्ज हैं। सरकार ने उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।
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पुलिस हिरासत: ग्रामीणों की सूचना पर फौरन छिपादोहर पुलिस मौके पर पहुँची और दोनों को अपनी सुरक्षा में ले लिया। हालांकि, संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने अभी इस गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि (Official Confirmation) नहीं की है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उनकी शिनाख्त पूरी हो चुकी है।
जब ग्रामीणों ने नक्सलियों के खिलाफ खोला मोर्चा
लातेहार और पलामू प्रमंडल का यह इलाका दशकों से लाल आतंक (Naxalism) का गढ़ रहा है।
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बदलती तस्वीर: एक समय था जब नक्सली फरमानों के आगे गांव वाले चुप रहते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में 'ग्राम रक्षा दल' और स्थानीय युवाओं की जागरूकता ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है।
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बच्चा चोरी की अफवाह बनी काल: दिलचस्प बात यह है कि जिस 'बच्चा चोरी' की अफवाह से पुलिस परेशान रहती है, आज उसी अफवाह के डर ने एक इनामी नक्सली को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया।
सुरक्षा बलों में हलचल: आधिकारिक पुष्टि का इंतज़ार
जैसे ही यह खबर फैली कि 10 लाख का इनामी कमांडर ग्रामीणों के हत्थे चढ़ गया है, पलामू और लातेहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी सक्रिय हो गए।
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सघन पूछताछ: फिलहाल नक्सलियों को किसी गुप्त स्थान पर ले जाकर पूछताछ की जा रही है ताकि उनके नेटवर्क और भविष्य की योजनाओं का पता लगाया जा सके।
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खुफिया इनपुट: पुलिस यह भी जांच रही है कि मृत्युंजय भुइयां इस इलाके में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने आया था या फिर शरण लेने की कोशिश कर रहा था।
लातेहार की यह घटना साबित करती है कि जनशक्ति के आगे बड़े से बड़ा अपराधी भी टिक नहीं सकता। जिस कमांडर को पकड़ने के लिए सुरक्षा बल सालों से जंगलों की खाक छान रहे थे, उसे ग्रामीणों ने अपनी सूझबूझ से दबोच लिया। अब सबकी निगाहें पुलिस की उस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जहाँ इस 'अनोखी गिरफ्तारी' की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
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