Chaibasa Mafia: खूनी खेल के बाद भी बेखौफ! ट्रैक्टर से युवक को कुचला, फिर दिनदहाड़े शहर में अवैध बालू ढुलाई
पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) में अवैध बालू माफिया बेलगाम हैं। जैंतगढ़ में एक युवक को ट्रैक्टर से कुचलने की घटना के ठीक अगले दिन, जिला मुख्यालय चाईबासा में दिनदहाड़े अवैध बालू ढुलाई करते ट्रैक्टर पकड़े गए। पुलिस और खनन विभाग की किरकिरी के बीच जानें इस पूरे मामले की हकीकत।
Chaibasa Mafia: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (Chaibasa) जिले में इन दिनों बालू माफिया का आतंक चरम पर है। स्थिति यह है कि माफियाओं के आगे न सिर्फ कानून बल्कि इंसानी जान की भी कोई कीमत नहीं रही। जिस घटना से पूरा इलाका सदमे में है, वह है जैंतगढ़ में अवैध बालू खनन (Illegal Sand Mining) का विरोध करने पर एक युवक को ट्रैक्टर से कुचलकर मार डालना। यह जघन्य हत्या अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि अगले ही दिन, इन बेखौफ अपराधियों ने जिला मुख्यालय चाईबासा में खुलेआम कानून को चुनौती दी।
खूनी वारदात के बाद 'राजधानी' में खुलेआम धंधा!
सोचने वाली बात यह है कि जिस जैंतगढ़ हत्याकांड ने पूरे प्रदेश में पुलिस-प्रशासन और खनन विभाग की किरकिरी करा दी है, उसके ठीक दूसरे दिन, Chaibasa Mafia ने अपनी दहशतगर्दी जारी रखी। चाईबासा शहर—जहां जिले के तमाम वरीय पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहते हैं—वहाँ के व्यस्ततम तांबो चौक से दिनदहाड़े, बेखौफ तरीके से बालू लदे ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पार की जा रही थीं। यह दृश्य साफ दर्शाता है कि बालू माफिया को न पुलिस का डर है और न ही कानून का!
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, माफिया कुजू नदी से धड़ल्ले से अवैध खनन कर रहे थे और बिना किसी रोकटोक के इसकी ढुलाई शहर के बीचों-बीच से कर रहे थे।
मुफस्सिल थाना प्रभारी की त्वरित कार्रवाई
हालांकि, Chaibasa Mafia की इस हिमाकत को मुफस्सिल थाना पुलिस ने बर्दाश्त नहीं किया। मामले की सूचना थाना प्रभारी विनोद कुमार को मिलते ही, उन्होंने तत्काल कार्रवाई की। उन्होंने मौके पर पहुंचकर बालू से लदे दोनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को जब्त कर लिया। दोनों ट्रैक्टर को थाना में लाकर रखा गया है और पुलिस इस पर अग्रतर कानूनी कार्रवाई में जुट गई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए खनन विभाग को भी सूचना दे दी है, ताकि अवैध खनन के खिलाफ नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
हालांकि, पुलिस की इस त्वरित छापेमारी के दौरान किसी भी माफिया या ड्राइवर की गिरफ्तारी नहीं हो पाई। पुलिस के पहुंचने से पहले ही अपराधी मौके से फरार हो गए, जो यह भी दिखाता है कि उन्हें पुलिस की गतिविधियों की जानकारी पहले ही मिल जाती है।
कई गंभीर सवाल: कौन है इस माफिया राज का सरगना?
जैंतगढ़ की घटना को झारखंड के इतिहास में एक काला अध्याय माना जा रहा है, जहाँ विरोध करने पर एक युवक को उसकी जान से हाथ धोना पड़ा। ऐसे में, इस खूनी खेल के ठीक बाद जिला मुख्यालय में खुलेआम अवैध धंधा कई गंभीर सवालों को जन्म देता है:
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क्या माफिया को प्रशासन का कोई संरक्षण प्राप्त है?
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जिला मुख्यालय में दिनदहाड़े ढुलाई के बावजूद स्थानीय पुलिस-पिकेट को सूचना क्यों नहीं मिली?
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युवक की हत्या के बाद भी खनन विभाग क्यों निष्क्रिय रहा?
यह पूरा घटनाक्रम प्रशासन की सक्रियता पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है और यह मांग करता है कि केवल ट्रैक्टर जब्त करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इस पूरे Chaibasa Mafia राज के सरगना और उनके अवैध नेटवर्क का पर्दाफाश होना ज़रूरी है।
पश्चिमी सिंहभूम के नागरिकों की सुरक्षा और अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए पुलिस की यह कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन अब निगाहें फरार माफियाओं की गिरफ्तारी और उनके किंगपिन पर टिकी हैं।
क्या आप पश्चिमी सिंहभूम में अवैध खनन पर खनन विभाग द्वारा की गई पिछली बड़ी कार्रवाई के बारे में जानना चाहेंगे?
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