Jharkhand Weather : रांची का पारा 10.4°C तक गिरा, झारखंड में शीतलहर से बचने के लिए यह काम तुरंत करें
रांची समेत झारखंड में नवंबर की शुरुआत में ही तापमान 10 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। पिछले साल के मुकाबले इस साल कनकनी बहुत ज्यादा है। खूंटी का न्यूनतम तापमान 8.5 डिग्री दर्ज किया गया है। पश्चिमी विक्षोभ समय से पहले आ गया है और हिमालय की बर्फबारी का असर झारखंड पर पड़ रहा है। अगले दो दिनों में इन पश्चिमी जिलों में शीतलहर चलने की संभावना है। जानिए मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार, इस अचानक बढ़ी ठंड और न्यूनतम पारा में संभावित गिरावट का पूरा कारण।
रांची, 14 नवंबर 2025 – झारखंड में नवंबर के दूसरे सप्ताह में ही ठंड ने अपना ऐसा असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है, जिससे राज्यवासी चौंक गए हैं। आमतौर पर नवंबर में सामान्य ठंड पड़ती है, लेकिन इस साल रांची समेत पूरे राज्य में न्यूनतम तापमान अपने औसत से तीन से चार डिग्री नीचे जा चुका है। पिछले साल की तुलना में भी इस साल कनकनी का स्तर कहीं ज्यादा है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले दो दिनों तक राज्य में कहीं-कहीं शीतलहर चलने की संभावना है, जिससे न्यूनतम तापमान में और गिरावट आ सकती है। सवाल यह है कि क्या जलवायु परिवर्तन ही इस अप्रत्याशित ठंड का कारण है, और राज्य में समय से पहले ही पश्चिमी विक्षोभ का आना किस बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहा है?
तापमान में रिकॉर्ड गिरावट: औसत से नीचे पारा
राज्य के प्रमुख शहरों में न्यूनतम तापमान सामान्य औसत से काफी नीचे दर्ज किया गया है, जो इस बार की तीव्र ठंड को दर्शाता है।
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रांची का हाल: गुरुवार को रांची का न्यूनतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री नीचे गिरकर 10.4 डिग्री पर रहा। यहां तक कि अधिकतम तापमान भी 25.2 डिग्री है, जो सामान्य से दो डिग्री कम है।
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मेदिनीनगर: मेदिनीनगर का न्यूनतम तापमान 10.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.5 डिग्री कम है।
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सबसे ठंडा क्षेत्र: पिछले 24 घंटे के दौरान राज्य में खूंटी का न्यूनतम तापमान सबसे कम 8.5 डिग्री दर्ज किया गया, जिसके कारण यहां ठंड अत्यधिक रही।
पश्चिमी विक्षोभ का असर: कनकनी बढ़ने का कारण
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस अप्रत्याशित ठंड के पीछे जलवायु में लगातार हो रहा बदलाव और एक विशिष्ट मौसमी घटना मुख्य कारण है।
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समय से पहले आगमन: आमतौर पर पश्चिमी विक्षोभ नवंबर के अंतिम दिनों या दिसंबर से आना शुरू होता है, लेकिन इस बार यह समय से पहले ही आ गया है।
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बर्फबारी का प्रभाव: पश्चिमी विक्षोभ के आने और हिमालय में बर्फबारी होने के कारण झारखंड समय से पहले ही सर्द हो चुका है। यही कारण है कि ठंडी हवाएं सीधे झारखंड की ओर रुख कर रही हैं, जिससे कनकनी लग रही है।
इन जिलों में शीतलहर का पूर्वानुमान
मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने चेतावनी दी है कि अगले दो दिनों के दौरान ठंड और बढ़ सकती है।
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शीतलहर वाले जिले: राज्य के पश्चिमी जिलों जैसे गढ़वा, पलामू, चतरा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा समेत रांची और खूंटी में भी कहीं-कहीं शीतलहर चलने की संभावना है।
यह तालिका स्पष्ट रूप से दिखाती है कि 2025 में तापमान में अभूतपूर्व गिरावट आई है, जिससे लोगों को समय से पहले गर्म कपड़े निकालने और अलाव जलाने की जरूरत पड़ गई है।
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