Burma Mines Action: रेलवे का अतिक्रमण हटाओ अभियान, डेढ़ घंटे देरी से सुरक्षा बल पहुंचे, दो गोदाम और एक मकान ध्वस्त
बर्मामाइंस लकड़ी टाल में रेलवे का बड़ा अभियान, दो गोदाम और एक मकान ध्वस्त, सुरक्षा बल देरी से पहुंचे, भविष्य की परियोजनाओं के लिए जमीन खाली कराने की कार्रवाई।
Jamshedpur Big Action: जमशेदपुर के बर्मामाइंस स्थित लकड़ी टाल क्षेत्र में मंगलवार को रेलवे प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। कार्रवाई में रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग, RPF के जवान, जिला प्रशासन द्वारा नियुक्त दंडाधिकारी तथा बर्मामाइंस थाना के पुलिसकर्मी मौजूद रहे। हालांकि, सुरक्षा बल के जवानों के समय पर नहीं पहुंचने के कारण अभियान डेढ़ घंटे की देरी से शुरू हुआ।
अतिक्रमणकारियों ने किया विरोध, फिर रुख नरम
अभियान की शुरुआत होते ही वर्षों से रेलवे की जमीन पर रह रहे लोगों ने विरोध जताया। कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। लेकिन प्रशासन ने लोगों को समझाने की कोशिश की। भविष्य में प्रस्तावित विकास परियोजनाओं के बारे में जानकारी देकर लोगों का रुख नरम किया गया। कई लोगों ने स्वेच्छा से जमीन खाली करने का आश्वासन भी दिया।
दो गोदाम और एक मकान ध्वस्त
प्रशासन और रेलवे अधिकारियों ने सख्त रुख अपनाते हुए अभियान जारी रखा। किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती गई। कार्रवाई के दौरान दो गोदाम और एक मकान को ध्वस्त कर दिया गया। रेलवे प्रशासन ने साफ कहा कि रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जा किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सुरक्षा बल के देरी से पहुंचने पर सवाल
सुरक्षा बल के जवानों के डेढ़ घंटे देरी से पहुंचने ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर इतनी देर क्यों हुई? क्या पहले से योजना में कोई चूक थी? प्रशासन के अनुसार, अतिक्रमणकारियों के भड़कने पर हालात बिगड़ सकते थे, लेकिन गनीमत रही कि समझाइश से काम चल गया। बहरहाल, सुरक्षा इंतजामों को लेकर पुनर्विचार की आवश्यकता है।
विकास परियोजनाओं के लिए जरूरी है जमीन
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान भविष्य में प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए जमीन को खाली कराने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगे भी ऐसे अतिक्रमण के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि रेलवे संपत्ति को सुरक्षित रखा जा सके। इस बार कार्रवाई के दौरान रेलवे ने अपने अधिकारियों और आरपीएफ के अलावा बर्मामाइंस थाना पुलिस को भी साथ लिया था।
कुछ लोगों ने खुद ही किया कब्जा खाली
प्रशासन की समझाइश का असर यह हुआ कि कई अतिक्रमणकारियों ने स्वेच्छा से जमीन खाली करने का आश्वासन दिया। कुछ ने मौके पर ही अपना सामान हटाना शुरू कर दिया। यह अपने आप में एक सकारात्मक संकेत है कि लोग अब अवैध कब्जे के परिणाम समझ रहे हैं और प्रशासन की कार्रवाई को स्वीकार कर रहे हैं।
शुरुआत में विरोध, बाद में शांति
अभियान की शुरुआत में लोगों ने जमकर हंगामा किया। लेकिन बाद में मामला शांत हो गया। रेलवे और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी के साथ-साथ पुलिस बल की मौजूदगी ने स्थिति को नियंत्रण में रखने में मदद की। दो गोदाम और एक मकान को गिराने के बाद टीम वापस लौट गई।
आपकी राय क्या है – क्या रेलवे जमीन पर अतिक्रमण करने वालों को बिना मुआवजा दिए हटाना सही है? कमेंट में बताएं।
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