आरबीआई भारतीय नोटों पर रविंद्र नाथ टैगोर और एपीजे अब्दुल कलाम के छवियों का उपयोग कर सकता है, पर क्यों

आरबीआई भारतीय नोटों पर रविंद्र नाथ टैगोर और एपीजे अब्दुल कलाम के छवियों का उपयोग कर सकता है, पर क्यों

आरबीआई भारतीय नोटों पर रविंद्र नाथ टैगोर और एपीजे अब्दुल कलाम के छवियों का उपयोग कर सकता है, पर क्यों
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आरबीआई भारत में ऐसे नोट लाने जा रही है जिन नोटों पर हम भारत के जैसे महान लोगों को देखेंगे जिनकी छवि हम पहले भारतीय नोटों पर नहीं देखे थे अब तक भारतीय नोटों में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की छवि नहीं होती थी हालांकि आरबीआई के रिपोर्ट  पर विश्वास किया जाए तो भारतीय मुद्रा जल्द ही बदल सकती है

वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक आरबीआई कथित तौर पर कुछ मूल्य वर्ग के बैंक नोटों पर नई छवि की श्रृंखला लाने वाली है जिसमें वाटर मार्क के तौर पर रविंद्र नाथ टैगोर और एपीजे अब्दुल कलाम का छवि उपयोग में लाया जा सकता है

रविंद्र नाथ टैगोर ने बंगाल के महानतम प्रतीकों में से एक के रूप में याद किया जाता है और राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जो भारत के 11 राष्ट्रपति थे जिन्हें मिसाइल मैन के रूप में भी याद किया जाता है यह तो ऐसे महान व्यक्ति है जो महात्मा गांधी के साथ देश के बैंक नोटों में अपनी जगह बना सकते हैं|

परिवर्तन की क्या जरूरत

 जैसा कि आप जानते हैं भारत अमेरिका के डॉलर की ही तरह विभिन्न मूल्य वर्गों के कुछ संस्थापक विधाओं जैसे जॉर्ज वॉशिंगटन वेज आमीन फ्रैंकलीन थॉमस के चित्र है और जिस पर एंड्रयू जैक्सन ,अलेक्जेंडर ,हैमिल्टन और कुछ 19वीं सदी के राष्ट्रपति जिनमें अब्राहम लिंकन भी शामिल थे

परंतु भारत में सिर्फ महात्मा गांधी का छवि ही भारतीय नोटों में यूज होता है परंतु अगर आप बात करेंगे भारत के पड़ोसी देशों की तो पाकिस्तान चीन अपने नोटों में एक ही संस्थापक का छवि का यूज किया जाता है|

कितनी प्रगति हुई है?


आरबीआई सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया जो कि वित्त मंत्रालय के अधीन है
आईआईटी दिल्ली एमेरिटस प्रोफेसर दिलीप जी साहनी को गांधी टैगोर और कलाम वाटर मार्क के नमूनों केदो दो अलग सेट भेजे हैं साहनी को 2 सीटों में से चुना और उन्हें स्वीकार सरकार द्वारा अंतिम विचार के लिए पेश करने के लिए कहा गया है अगर यह सरकार द्वारा अंतिम विचार एक्सेप्ट हो जाता है तो भारतीय मुद्रा में एक ऐतिहासिक परिवर्तन होगा >

वॉटरमार्क की जांच कर रहे हैं प्रोफेसर साहनी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंस्ट्रूमेंटेशन में महारत हासिल किए हुए हैं इन्हें इस साल जनवरी में मोदी सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था सूत्रों का कहना है 2017 में आरबीआई ने 9 आंतरिक समितियों में से एक इसका गठन बैंक नोटों की एक नई श्रृंखला के लिए नई सुविधा की सिफारिश करने के लिए किया गया था उस संगठन ने 2020 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमें प्रस्तावित किया गया कि गांधी के अलावा टैगोर और कलाम के वाटर मार्क आंकड़े भी विकसित किए जाने चाहिए ₹2000 के नोट को छोड़कर सभी करेंसी नोट में को शामिल करना चाहिए जिस की छपाई पहले ही बंद हो चुकी है 2021 में आरबीआई ने अपने भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रन प्राइवेट लिमिटेड होशंगाबाद में एसपीएमसीआईएल की सिक्योरिटी पेपर मिल के निर्देश दिए थे इसके बाद और एसपीएमसीआईएल ने उनके नमूनों की जांच के लिए साहनी को भेजा अधिकारी के साथ साहनी ने इसके कई दौर में चर्चाएं की |कोलकाता हाईकोर्ट में 2017 में यह जनहित याचिका दायर की गई थी

2017 में कोलकाता उच्च न्यायालय ने केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक को 8 सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया था कि भारतीय मुद्रा में नेताजी सुभाष चंद्र बोस या किसी अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तित्व  तस्वीरें क्यों नहीं हो सकती । पृथ्वी दास गुप्ता नामक  कोलकाता के निवासी की एक जनहित याचिका की सुनवाई के बाद ऐसा फरमान कोलकाता हाई कोर्ट ने दिया था जनहित याचिका में दासगुप्ता ने कहा हालांकि महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सफल प्रमाणित के लिए काफी श्रेय हासिल किया है लेकिन भारत में बहुत सारे वैसे महान व्यक्तित्व है जिन्होंने अपना महत्वपूर्ण योगदान भारत की आजादी के लिए और भारत के उत्थान के लिए दिया है याचिकाकर्ता ने अपने दावे के समर्थन में कई ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत किए जो कि कोलकाता हाई कोर्ट द्वारा मान्य थे